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जानिए, अयोध्या में कैसे बनेगा राम मंदिर?, कैसी है मंदिर निर्माण की तैयारी?

ऐसे में सवाल अब यही उठता है कि अयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा ? मंदिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बनेगा या अध्यादेश से या फिर संसद से क़ानून पास होने के बाद ? ये वो सवाल हैं जिन पर पूरा देश आज बहस कर रहा है. लेकिन क्या आपको पता है कि पिछले 28 वर्षों से अयोध्या में एक जगह ऐसी भी है, जहां राम मंदिर के निर्माण की तैयारी का काम चल रहा है. आपको अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि न्याय कार्यशाला में मंदिर निर्माण की तैयारी पूरी दिखाई देगी. भगवान श्रीराम की जन्म भूमि से महज़ 2 किलोमीटर दूर इस कार्यशाला में पत्थरों को तराशने का कार्य 1990 से लगातार जारी है .

इस कार्यशाला में राम मंदिर के लिए पत्थरों की नक्काशी की जा रही है . अब तक राम मंदिर के लिए 65% पत्थरों को तराशा जा चुका है . राम मंदिर निर्माण में 1 लाख 75 हज़ार घन फुट पत्थरों की ज़रूरत है, जिसमें से 1 लाख घन फुट पत्थर पर नक्काशी और तराशी का काम पूरा हो चुका है . राजस्थान, गुजरात और यूपी के कारीगर पत्थर तराशने में जुटे हुए हैं, 1990 में 4 कारीगरों से न्यास कार्यशाला की शुरूआत हुई थी और 1993-94 तक 80 कारीगर राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने में जुट गए थे . वर्ष 2007 तक लगभग 90 कारीगर पत्थरों का तराशी का कार्य कर रहे थे . हालांकि इन दिनों महज़ 8-10 कारीगर ही न्यास कार्यशाला में काम रहे हैं .

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राजस्थान के भरतपुर के बंशीपहाड़पुर से राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर मंगाए जा रहे हैं . इन पत्थरों की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई जाती है, यानि कि 1000 वर्षों तक पत्थरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और राम मंदिर निर्माण के लिए सबसे मज़बूत और टिकाऊ पत्थर हैं .

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कार्यशाला में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल भी रखा हुआ है, जिसे प्रसिद्द आर्किटेक्ट सीबी सोनपुरा ने डिज़ायन किया है . गुजरात के रहने वाले सीबी सोनपुरा के पूर्वज़ों ने ही सोमनाथ मंदिर का भव्य मॉडल तैयार किया था . यहां अयोध्या में भी सोनपुरा परिवार के लोग आज भी कार्यशाला में लगातार ड्यूटी कर रहे हैं . इस मॉडल के मुताबित अयोध्या में अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश या सरकार के अध्यादेश से मंदिर निर्माण का आदेश होता है तो यह कुल 2 मंज़िल का मंदिर होगा . जिसमें भू-तल और प्रथम तल होगा .

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फिलहाल राम मंदिर प्रारूप का भू-तल वाले हिस्सों के पत्थरों की तराशी पूरी हो चुकी है . राम मंदिर के भू-तल में सिंहद्वार, गर्भगृह, नृत्यद्वार, रंगमंडप बनेगा . वहीं प्रथम तल पर राम दरबार की मूर्तियों को स्थान दिया जाएगा . यही नहीं प्रस्तावित राम मंदिर के मॉडल के मुताबिक मंदिर में 24 दरवाज़ों का चौखट होगा, जो की संगमरमर के पत्थरों से बनाया जाएगा . इन संगमरमर के पत्थरों पर राजस्थान के मकराना में काम चल रहा है . वहीं कार्यशाला में राम मंदिर के शिखर का काम अभी शुरू नहीं हुआ है .

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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला की देखरेख कर रहे विश्व हिंदू परिषद के नेता शरद शर्मा ने Zee News को बताया कि 1990 से कार्यशाला की शुरूआत हुई है . इस मंदिर के निर्माण के लिए हिंदू समाज से 1 रुपये 25 पैसे प्रति व्यक्ति चंदा लिया गया और ईंट श्रीराम शिला के तौर पर मांगी गई . इसके बाद लोगों ने शिलादान किया और लगभग 2 लाख 75 हज़ार गांव मे शिलादान हुआ .

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हिंदू समाज से लगभग 4 करोड़ 75 लाख रूपये मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठा हुए . शरद शर्मा ने ये भी बताया कि सिर्फ देश के ही नहीं बल्कि विदेशों से भी राम मंदिर निर्माण के लिए ईंटों का सहयोग मिला . यहां 55 देशों से ईंटें आई हैं . सूरीनाम, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, जर्मनी, कनाडा, वर्मा, बांग्लादेश जैसे देशों से ईंटे दान में मिली . शरद शर्मा ने कहा कि आदेश मिलने के बाद हम 3-4 वर्षों में 100 कारीगरों की मदद से राम मंदिर का भव्य और दिव्य निर्माण कर देंगे .

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वहीं कार्यशाला को सुपरवाईज़ कर रहे सोनपुरा परिवार के अन्नूभाई सोनपुरा Zee News से बातचीत में कहते हैं कि राम मंदिर के निर्माण में 100 से ज़्यादा कारीगरों की आवश्यकता पड़ेगी और मंदिर निर्माण में लोहे का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होगा . प्रस्तावित डिज़ायन के मुताबिक 10 फीच ईंट की नींव और उसके ऊपर 5 फीट पत्थरों की नींव राम मंदिर की होगी .

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पिछले कई सालों से इस कार्यशाला में पत्थर की नक्काशी में जुटे गुजरात के रजनीकांत ने बताया कि राम मंदिर के लिए पत्थर तराशना उनके लिए गर्व की बात है और इससे बड़ा पुण्य कुछ और नहीं हो सकता है . रजनीकांत को आशा है कि उनके द्वारा तराशे गए पत्थरों से जल्द अयोध्या में राम मंदिर का भव्य निर्माण होगा .कुल मिलाकर राम मंदिर बनाने का आदेश तो पता नहीं कब मिलेगा, लेकिन पिछले 28 वर्षों से अयोध्या मे कारीगर हर रोज़ मंदिर निर्माण के काम में लगे हैं.