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ZEE जानकारीः नोटबंदी के 2 वर्ष बाद भारत की आर्थिक सेहत का विश्लेषण

आज हम 2 वर्ष बाद नोटबंदी के परिणामों का DNA टेस्ट करेंगे. इसके लिए हमने गहरा Research किया है. हमने अर्थव्यवस्था के हर मापदंड को नोटबंदी की कसौटी पर परखने की कोशिश की है . नोटबंदी की वजह से Tax की व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़ा है . काला धन जमा करने और संपत्ति को छुपाने की प्रवृत्ति में कमी आई है . जब सरकार को Tax ज़्यादा मिलेगा तो इसका मतलब है कि सड़क, रेलवे, बंदरगाहों और Infrastructure में सुधार होगा . इसके अलावा technology, स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज़्यादा पैसा खर्च किया जाएगा.

हालांकि नोटबंदी के आलोचकों का कहना है.. कि सारा काला धन तो वापस बैंकों में आ गया.. तो फिर जिस Black Money या काले धन को खत्म करने के लिए नोटबंदी की गई थी वो पैसा कहां गया?.. इसका एक मतलब ये भी है कि वो सारा पैसा वापस बैंकों में आ गया. वो सारा पैसा White Money में तब्दील हो गया. हमारे देश में इस बात पर हमेशा बहस होती रहेगी.. कि करोड़ों लोगों को लाइन में खड़ा करने का फैसला जायज़ था या नहीं ? लेकिन किसी भी विषय पर कोई राय बनाने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी और जागरूकता होना बहुत ज़रूरी है. अब हम एक एक करके कुछ आंकड़ों को आपके सामने रखेंगे. और पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी.

नोटबंदी से पहले के दो वर्षों यानी…. 2014 से 2016 के मुकाबले.. नोटबंदी के बाद के दो वर्षों यानी 2016 से 18 के बीच Personal Income Tax Collection में 39 प्रतिशत का इजाफा हुआ है . इसका मतलब ये है कि नोटबंदी के बाद अपनी आमदनी बताने वाले लोगों की संख्या में इज़ाफा हुआ है . इसी तरह Corporate Tax में 19.7 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है . इसका मतलब ये है कि व्यापार करने वाले लोग पहले के मुकाबले ज़्यादा पारदर्शिता बरत रहे हैं और टैक्स दे रहे हैं.

Other Direct Taxes में 1 हज़ार 133 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है . ये बहुत बड़ी कामयाबी है . नोटबंदी के बाद जो Income Disclosure Schemes लाई गई थीं . उनके तहत जिस अघोषित आय का खुलासा हुआ, उस पर लगे Tax को भी Other Direct Taxes में जोड़ा गया है . इसीलिए इसमें 1 हज़ार 133 प्रतिशत का इजाफा हुआ है . कुल मिलाकर नोटबंदी के बाद Total Direct Taxes में 27.84 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है. नोटबंदी के बाद Cashless Economy के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल हुई है . Credit cards, Debit cards, Mobile banking, Point-of-Sale machines यानी POS Machines और UPI based applications का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में ज़बरदस्त वृद्धि हुई है .

इससे लोगों को 4 फायदे हुए हैं. पहला फायदा… पैसे का लेन-देन कम समय में आसानी से हो रहा है . दूसरा फायदा… नोटों को लेकर घूमने की कोई ज़रूरत नहीं है . तीसरा फायदा…नोटों के चोरी होने, खो जाने या भीगने का खतरा नहीं है . और चौथा फायदा.. अपनी आमदनी का हिसाब-किताब करना आसान हुआ है . Reserve Bank of India और National Payments Corporation of India के आंकड़ों के मुताबिक BHIM Application, Unstructured Supplementary Service Data Services और UPI के माध्यम से लेन देन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है .

नवंबर 2016 में 90 करोड़ रुपए का Cashless लेन-देन हुआ था . जबकि नवबंर 2017 में 9 हज़ार 640 करोड़ रुपए का Cashless लेन-देन हुआ था . और अक्टूबर 2018 में.. 74 लाख 978 हजार करोड़ रुपए का Cashless लेन-देन हुआ. हम आपको एक Graph के ज़रिए ये दिखा रहे हैं कि Mobile Banking में कैसे इज़ाफ़ा हुआ है . इसी तरह POS Machines के ज़रिए होने वाले भुगतान में भी इज़ाफ़ा हुआ है .POS Machines, वो मशीनें हैं जिनसे Credit Card और Debit Card के माध्यम से भुगतान किया जाता है .

नवंबर 2016 में Credit Card से लेन-देन 26 हजार 699 करोड़ रुपये था . जबकि अप्रैल 2018 में Credit Card से होने वाला लेन-देन 45 हजार 174 करोड़ रुपये हो गया. नवंबर 2016 में Debit Card से 1 लाख 55 हजार करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ था . जबकि अप्रैल 2018 में Debit Card से 3 लाख 10 हजार करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ . यानी Debit और Credit Card के ज़रिए Cashless लेन-देन में वृद्धि हुई है . नोटबंदी के 2 वर्ष बाद इसे लेकर अर्थशास्त्रियों के क्या विचार हैं ? ज़रा इस पर भी गौर कीजिए .