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SC में सेना ने दायर की याचिका, ‘आतंकग्रस्त क्षेत्रों में मुठभेड़ में सैनिको पर न हो कार्रवाई’

नई दिल्ली: देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाने वाले फ़ौजियों ने कानून के दुरुपयोग से अपनी सुरक्षा के लिए सुप्रीमकोर्ट में फ़रियाद लगाई है. सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई होगी जिसमे 300 आर्मी अफसर ने अर्जी दाखिल कर कहा है कि आतंकवाद व नक्सलवाद ग्रस्त इलाक़ों में सेना की कार्रवाई में अगर कोई मारा जाता है तो किसी सैनिक के ख़िलाफ़ एफ़आइआर न हो. याचिका में कहा गया है कि अफस्पा (AFSPA) के तहत कार्रवाई में फ़ौजी पर एफआईआर दर्ज न हो. अफस्पा स्पेशल लॉ है, जो गड़बड़ी रोकने के लिए संवेदनशील इलाक़ों में लगाया गया है.

याचिका में कहा गया है कि सेना पर मुक़दमे दर्ज करने से सेना का मनोबल गिरेगा. सेना पर मुक़दमों दर्ज करने से सेना का जवान आतंकवादियों और नक्सलियों के आमने-सामने होने पर भी उन पर कार्रवाई करने से झिझकेगा. साथ ही सेना का मनोबल गिरने से राष्ट्र का नुक़सान होगा.

दरअसल, मणिपुर में आतंकियों के ख़िलाफ़ सेना की मुठभेड़ की कार्रवाई में कुछ लोगों के मारे के बाद सुप्रीमकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी. याचिका में सेना की मुठभेड़ को फ़र्ज़ी कहते हुए इसकी सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी. इस याचिका पर सुप्रीमकोर्ट के दो जजों की बेंच ने सीबीआई को इस मुठभेड़ में शामिल सैनिकों के ख़िलाफ़ एफ़आइआर दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार करने का आदेश दे दिया था और कोर्ट में ट्रायल से पहले ही इन सैनिकों को हत्यारा कह दिया था.

इसके अलावा कश्मीर के शोपियां इलाक़े में सैनिक कार्रवाई पर राज्य पुलिस ने मेजर आदित्य व अन्य सैनिकों के ख़िलाफ़ हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया था. सैनिकों के ख़िलाफ़ इन घटनाओं को लेकर सेना में असंतोष है और देश की रक्षा के लिए आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने पर फ़ौजियों में कानून के दुरूपयोग की आशंका व्याप्त है.