राजस्थान

जब अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे, ‘महेश बंगाली मार्किट चलो, गोलगप्पे खाएंगे’!

जयपुर: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लोग केवल एक नेता के रूप में ही नहीं जानते. उनके व्यक्तित्व और स्वभाव के लिए भी उन्हें पहचानते हैं. वाजपेयी जननेता थे. यहां तक कि विपक्ष के नेता भी उनका बेहद सम्मान करते हैं. गुरुवार शाम को 93 की उम्र में उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद से ही देशभर में शोक की लहर है. देशभर उनके निधन से गमगीन है. वहीं दिल्ली में भी उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ा हुआ है.

हालांकि, वह हमेशा ही ऊर्जा से भरपूर रहते थे और अपनी हार से भी घबराते नहीं थे. हंसकर सबसे मिला करते थे. उन्हें बंगाली मार्केट के गोलगप्पे भी बेहद पसंद थे और वह अक्सर ही गोलगप्पे खाने जाया करते थे. दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी जब एक नेता के रूप में उभरने लगे और लोगों के बीच उनकी खास पहचान बनने लगी तो बीजेपी द्वारा उनके सहयोग के लिए एक व्यक्ति को नियुक्त किया गया. जयपुर के शिवकुमार को यह जिम्मेदारी सौंपी गई और उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई. शिवकुमार की नियुक्ति के बाद से ही वाजपेयी जी हमेशा जहां भी जाते उनके साथ शिवकुमार मौजूद रहते.

शिवकुमार के पुत्र महेश कुमार भी वाजपेयी के साथ 20 साल तक रहे हैं और उन्होंने जी मीडिया से बात करते हुए वाजपेयी से जुड़ी अपनी खास यादें साझां की. इसी बीच उन्होंने एक याद को साझां करते हुए बताया कि वाजपेयी जी अपनी हार का भी जश्न मनाया करते थे. महेश बताते हैं कि वह वाजपेयी जी को बापजी कहा करते थे. उन्होंने बताया कि 1985 में जब ग्वालियर से वाजपेयी चुनाव हार गए थे तब दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए कोई कार्यकर्ता नहीं था.

पिताजी (शिवकुमार) का फोन आया था तो मैं उन्हें अपनी पुरानी फिएट गाड़ी से रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचा. बाहर आए तो कुछ पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और कहा कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे वाजपेयी जी, फिर पार्टी की हार कैसे हो गई. तब वाजपेयी ने बड़े मुस्कुराते हुए उनको कहा था कि देखिए राजीव गांधी जितना ऊपर उठ सकते थे उठ गए. हम जितना नीचे गिर सकते थे गिर गए. अब हमारी बारी है ऊपर उठने की और यूं कहते हुए वह गाड़ी में बैठे और बोले महेश बंगाली मार्केट ले चलो गोलगप्पे खाएंगे. वाजपेयी जी ही भारतीय राजनीति में उन नेताओं में से एक थे जिन्हें अपनी हार भी सेलिब्रेट करनी आती थी. उसके बाद बंगाली मार्केट में जाकर हमने गोलगप्पे खाए उन्हें चाट खाने का भी बड़ा शौक था.