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कांग्रेस के लिए हमारे आर्मी चीफ ‘सड़क के गुंडे’, पाक आर्मी चीफ ‘सोने दे मुंडे’ : संबित पात्रा

नई दिल्‍ली : पाकिस्‍तान में वहां के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से  गले मिलने पर नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से दी गई सफाई पर बीजेपी ने पलटवार किया है. बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए हमारे आर्मी चीफ ‘सड़क के गुंडे’, पाक आर्मी चीफ ‘सोने दे मुंडे’ है.

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देश में समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं राहुल गांधी
पात्रा ने कहा ‘यह दुखद है कि सिद्धू ने इस मामले में कहा है कि भारतीय लोगों का दिल छोटा है. हम इसकी निंदा करते हैं.’ उन्होंने कहा कि हम इस मामले में जवाब चाहते हैं, लेकिन सिद्धू से नहीं, बल्कि राहुल गांधी से. उन्‍होंने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि क्‍या राहुल गांधी देश में समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं.

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उन्‍होंने कहा कि वह तो दोस्‍ती की खातिर पाकिस्‍तान गए थे. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो बिना परमीशन के पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर गए थे. उनकी प्रेस कांफ्रेंस की 5 बातें.

1. अपनी पाकिस्‍तान यात्रा को अमन-चैन के संदेश से जोड़ते हुए सिद्धू ने कहा कि इससे पहले भारत और पाकिस्‍तान के बीच शांति के कई प्रयास हो चुके हैं. अटल बिहारी वाजपेयी दोस्‍ती बस लेकर लाहौर गए थे. उसके बाद उन्‍होंने परवेज मुशर्रफ को भारत आने के लिए आमंत्रित किया.

2. उसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने नवाज शरीफ को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आने के लिए आमंत्रित किया. उसके बाद वह अचानक शरीफ से मिलने लाहौर गए.

3. बाजवा से गले मिलने पर पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने भी आपत्ति उठाते हुए कहा था कि सिद्धू से ऐसा नहीं करना चाहिए था. इस पर अपनी सफाई देते हुए सिद्धू ने कहा कि कैप्‍टन साहब समेत कांग्रेस के तमाम लोग इस पर अपनी बात कह चुके हैं. यह लोकतंत्र है और हर आदमी को अपनी बात कहने का अधिकार है.

4. इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि जहां तक बाजवा से मिलने का मसला है तो बाजवा गर्मजोशी से मुझसे मिले. मुझे मिलते ही उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए वह प्रयास कर रहे हैं. इसीलिए यह भाव जगाने वाली बात थी जिसके प्रति बाजवा के प्रति स्नेह उत्पन्न हुआ. मेरे ऊपर उठे इन सवालों पर मुझे दुख भी है और खेद भी है.

5. सिद्धू ने कहा कि ‘मेरी पाक यात्रा चर्चा का विषय बनी, ये राजनैतिक नहीं बल्कि मित्र का आमंत्रण था. वो दोस्त जो मेहनत से संघर्ष से पहुंचा.’  उन्‍होंने कहा वह (इमरान) दोनों देशों के बीच संबधों को सुधार सकता है. इमरान खान ने फोन करके खुद बुलाया और लिखित निमत्रंण भी आया. मैं ये दुर्भाग्य मानता हूं कि विभाजन के बाद दोनों देशों की कटुता खत्म नहीं हो सकी. आज वहां पर आतंकवादी संगठनों का जमावड़ा है.