छत्‍तीसगढ़ मध्यप्रदेश

कभी BJP के ‘अपराजेय योद्धा’ रहे सरताज सिंह को नहीं मिला टिकट, कांग्रेस ने दिया एक और

बीजेपी के अपराजेय योद्धा के तौर पर थी सरताज सिंह की पहचान
भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए सरताज सिंह ने शुक्रवार को नामांकन से पहले नर्मदा पूजन किया. जानकारी के मुताबिक स्थानीय सेठानीघाट पर अपनी पत्नी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उन्होंने पूजा की. आपको बता दें कि 5 बार सांसद और दो बार मंत्री और विधायक रहे सरताज सिंह दो बार नगर पालिका अध्यक्ष भी रह चुके हैं. सरताज सिंह की पहचान बीजेपी के अपराजेय योद्धा के रूप में थी. लेकिन इन चुनावों में वे बीजेपी के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं. जाहिर है कि इस वजह से बीजेपी को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

सरताज बोले- घर में बैठकर घुट-घुटकर मरने वालों में से नहीं
उधर सरताज सिंह ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. सिवनी-मालवा में उन्होंने हाल ही में अपने समर्थकों से मुलाकात की थी. इस दौरान सरताज भावुक हो गए थे. 78 साल के सरताज ने कहा था, “मैं घर में बैठकर घुट-घुटकर मरने वालों में से नहीं हूं. लडूंगा तो मैदान में, मरूंगा तो मैदान-ए-जंग में.” सरताज सिंह की चुनावी मैदान में वापसी से होशंगाबाद विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदद्वार डॉ सीता शरण शर्मा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

मध्यप्रदेश के जाने मानने कुर्मी नेता और शिवराज सरकार में कृषि मंत्री रहे डॉ रामकृष्ण कुसमरिया भाजपा के कद्दावर नेता हैं और उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने मध्यप्रदेश में पार्टी को बनाया. लेकिन मौजूदा दौर में कुसमरिया बेहद तकलीफ में हैं. इस चुनावी मौसम में वरिष्ठ नेताओं की यह तकलीफ भाजपा के लिए नासूर बन सकती है. कुसमरिया की मानें तो भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व मंत्री सरताज सिंह पार्टी में घुट रहे थे और उनकी ही तरह उन्हें भी अब घुटन महसूस हो रही है क्योंकि भाजपा में बुजुर्गों का सम्मान नहीं बचा और पार्टी के मौजूदा नेता मुगल शासकों के जैसे तानाशाही कर रहे हैं.

इसलिए बड़ा है सरताज का कद
शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सरताज सिंह ने लोकसभा की होशंगाबाद सीट से लगातार तीन (1989, 1991 और 1996) बार कांग्रेस के रामेश्वर नीखरा को हराया है. 1998 के लोकसभा चुनाव में वे अर्जुन सिंह को भी हराने में कामयाब रहे. सरताज सिंह अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं. सरताज सिंह ने 2008 के विधानसभा चुनाव में सिवनी मालवा सीट पर हजारी लाल रघुवंशी को हराया था. जिसके बाद 2013 के विधानसभा चुनावों में फिर इसी सीट से चुनाव जीता और मंत्री बने. आपको बता दें कि सरताज सिंह मध्य प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री थे, लेकिन उनकी उम्र का हवाला (बीजेपी का 75 साल का फॉर्मूला) देकर उन्हें बाद में पद से हटा दिया गया था. जिसके बाद ही उनके अगला चुनाव लड़ने पर संशय पैदा हो गया था. लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अंतिम वक्त तक कोशिश में लगे रहे.

कौन हैं सरताज सिंह
– सरताज सिंह का जन्म 26 मई 1940 को उज्जैन जिले के बड़नगर में हुआ था.
– सरताज सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1960 में स्नातक किया.
– 1962 में सरताज हरिविष्णु कामथ के सम्पर्क में आए और राजनीति में सक्रिय हुए.
– 1970 के इटारसी नगर पालिका चुनाव में सरताज सिंह एल्डरमेन चुने गए.
– 1971 में 6 माह तक नगर पालिका के कार्यकारी अध्यक्ष रहे.
– 1975 में नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए.

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