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ATM की तर्ज पर होंगे पेट्रोल पंप, कैशलेस भुगतान कर गाड़ियों में खुद भर सकेंगे तेल

नई दिल्ली: जिस तरह आप एटीएम से बिना किसी बैंककर्मी की मदद के पैसे निकालते हैं, ठीक उसी तरह बहुत जल्द इसी तर्ज पर पेट्रोल पंप भारत में होंगे. यहां आप अपने वॉलेट से कैशलेस मोड में पैसे चुकाकर खुद ही गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भरा सकेंगे. साथ ही यहां आप किरोसिन तेल भी ले सकेंगे. हाल में पोर्टेबल पेट्रोल पंप मशीन बनाने के लिए एलिंज नाम की कंपनी को पेट्रोलियम मंत्रालय से मंजूरी मिली है.

इस खास तरह की मशीन बनाने के लिए एलिंज ने चेक गणराज्य की कंपनी पेट्रोकार्ड से करार किया है. इस करार के बाद दोनों मिलकर भारत में पोर्टेबल पंप मशीन बनाने की यूनिट लगाएगी. इसमें करीब 16,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा. इन कंपनियों को बीते 10 अगस्त को पेट्रोलियम मंत्रालय से मंजूरी मिली है. अपने टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में पेट्रोकार्ड के संग एलिंज इन मशीनों के विनिर्माण की चार यूनिट स्थापित करेगी. यह स्थापना बाजार, राज्य और तेल कंपनियों की तरफ से दिखाई गई रुचि और मदद पर निर्भर करेगा.

क्या होते हैं पोर्टेबल पेट्रोल पंप
यह एक तरह का ऐसा पेट्रोल पंप होता है जहां कोई कर्मचारी नहीं होता है. आप यहां डिजिटल माध्यम से पैसे चुकाकर खुद ही अपनी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल भरा सकेंगे. इसमें आप ई-वॉलेट से भी भुगतान कर सकते हैं. एलिंज के प्रबंध निदेशक इंद्रजीत प्रथी ने कहा है कि पोर्टेबल पेट्रोल पंप उन लोगों के लिए बेहतर साबित होगा, जो सुदूर इलाकों और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं.

लागत और जरूरी कारक
भारत में पोर्टेबल पेट्रोल पंप कई लोगों को कारोबार का बेहतर मौका उपलब्ध करा सकता है. इसके लिए मात्र 400 वर्ग मीटर में जमीन की जरूरत होती है. सामान्य पेट्रोल पंप के लिए तो काफी बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है. यह खासकर उन लोगों को बेहतर मौका उपलब्ध कराएगा जो कारोबार करने की शुरुआत करना चाहते हैं. इस पंप को स्थापित करने के लिए 90 लाख से लेकर 1.20 करोड़ रुपये की जरूरत है. मजे की बात यह है कि बैंक इसके लिए 80 प्रतिशत राशि लोन के रूप मे देने को तैयार भी हैं

पंप अलग-अलग क्षमता वाले होंगे
एलिंज को भरोसा है कि राज्य के साथ-साथ तेल कंपनियां इस संबंध में टेंडर जारी करेंगे और जिस किसी को यह टेंडर मिलेगा, वह पोर्टेबल पेट्रोल पंप को स्थापित कर सकेगा. पोर्टेबल पेट्रोल पंप की मशीन अलग-अलग आकार में होंगे. सबसे छोटी मशीन की क्षमता 9,000 लीटर की होगी, जबकि सबसे बड़ी मशीन की क्षमता 30,000 लीटर की होगी.