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महागठबंधन होना चाहिए, सरकार कांग्रेस के बाहरी समर्थन से भी बन सकती है : नायडू

देवगौड़ा और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी से मुलाकात के बाद नायडू ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस महान राष्ट्र को और लोकतंत्र तथा संविधान को बचाने के लिए हाथ मिलाना हमारी जिम्मेदारी है.’’ नायडू ने संकेत दिया कि केंद्र में सरकार बनाने के लिए एक प्रयोग इस तरह का भी हो सकता है जिस तरह से 1996 में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से देवगौड़ा के नेतृत्व में सरकार बनी थी.

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सरकार बनाने के 1996 के मॉडल का जिक्र कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश और आम-सहमति में दिलचस्पी रखता हूं. सब साथ में आएंगे. अभी कोई संगठन नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कुछ पहल की है और मैं सभी से मिल रहा हूं. उसके बाद हम मिलकर तय करेंगे कि आगे कैसे बढ़ा जाए.’’ इसी तरह के विचार रखते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर तो बातचीत बाद में हो सकती है, लेकिन इस समय पूरा ध्यान विपक्ष को एकजुट करने और लोकतंत्र बचाने पर है.

उन्होंने कहा कि दिसंबर या जनवरी में एक बड़ी किसान रैली होगी. कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘मेरी दिसंबर के अंत तक या जनवरी में रैली करने की योजना है. भाजपा को छोड़कर सभी क्षेत्रीय नेताओं को बुलाया जाएगा.’’ भाजपा नीत राजग सरकार की आलोचना करते हुए देवगौड़ा ने आरोप लगाया कि राजग ने देश में अनेक संस्थाओं को तबाह कर समस्याएं पैदा कर दी हैं.

नायडू ने पिछले सप्ताह राहुल गांधी समेत कई विपक्षी दलों के प्रमुखों से मुलाकात की थी. उन्होंने कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन को देश को बचाने की ‘लोकतांत्रिक बाध्यता’ करार दिया था. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह विपक्ष पर नियंत्रण के लिए सीबीआई और आयकर विभाग का इस्तेमाल कर रही है. नेताओं के उत्पीड़न के लिए छापे मारे जा रहे हैं. कर्नाटक और तमिलनाडु में भी यह सब देखने को मिल रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा गुजरात में भी ऐसे छापे मारे गये. नायडू ने कहा, ‘‘संस्थाओं को नुकसान पहुंचने के अलावा, भारतीय अर्थव्यवस्था भी डंवाडोल है क्योंकि नोटबंदी का अच्छा असर नहीं पड़ा.’’ नायडू नीत तेदेपा ने इस साल मार्च में भाजपा नीत राजग से नाता तोड़ लिया था.