बिज़नेस

इन तीन मामलों में 5 साल से पहले भी मिल सकती है ग्रेच्युटी की रकम

किसी संस्थान में लगातार 5 साल तक काम करने पर कर्मचारी को ग्रेच्‍युटी का लाभ दिया जाता है. अब मोदी सरकार इस समय सीमा को घटाकर तीन साल करने की प्लानिंग कर रही है.

नई दिल्ली : किसी संस्थान में लगातार 5 साल तक काम करने पर कर्मचारी को ग्रेच्‍युटी का लाभ दिया जाता है. अब मोदी सरकार इस समय सीमा को घटाकर तीन साल करने की प्लानिंग कर रही है. यदि ऐसा होता है तो सवा करोड़ कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा. पेमेंट ऑफ ग्रेच्‍युटी एक्‍ट, 1972 के तहत ग्रेच्युटी का लाभ उस संस्‍थान के हर कर्मचारी को मिलता है जहां 10 से ज्‍यादा कर्मचारी काम करते हैं. सरकार ने टैक्‍स फ्री ग्रेच्‍युटी की रकम 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है.

ग्रेच्युटी की समय सीमा एक साल करने की मांग
कर्मचारी यूनियनों की तरफ से ग्रेच्युटी की समय सीमा को एक साल करने की मांग की जा रही है. सूत्रों के अनुसार ग्रेच्युटी मिलने की अवधि को घटाकर तीन साल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है और लेबर मिनिस्ट्री ने इंडस्ट्री से इस पर भी राय मांगी है. मंत्रालय इस पर इंडस्ट्री की राय जानना चाहता है कि ऐसा करने पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. साथ ही इसे लागू किया जाता है तो क्या दिक्कत आ सकती हैं. मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के नए बोर्ड के सामने रखा जाएगा.

ग्रेच्युटी की गणना में भी हो सकता है बदलाव
इसके अलावा यह भी खबर है कि ग्रेच्युटी की गणना के तरीकों में भी बदलाव पर विचार किया जा रहा है. फिक्सड टर्म एम्पलाई (अनुबंधित कर्मचारी) को भी ग्रेच्युटी का लाभ देने की तैयारी है. भले ही ऐसे कर्मचारी का टर्म पांच साल से कम ही क्यों न हो. सामान्यतया अनुबंध एक साल या तीन साल का होता है. इस अवधि के पूरा होने पर नियोक्ता कंपनी कर्मचारी का रिन्यूअल कर देती हैं. आमतौर पर लोगों का यही सवाल होता है कि क्या ऐसी भी कोई परिस्थिति हैं जिसमें ग्रेच्युटी की रकम पांच साल से पहले मिल सके. ऐसा केवल तीन निम्नलिखित परिस्थितियों में ही संभव है.

कर्मचारी की मृत्यु होने पर
दुर्भाग्यवश कंपनी या संस्थान में नौकरी करने के दौरान 5 साल से पहले कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे मामले में एम्पलाई के परिजनों को नियमानुसर ग्रेच्युटी की रकम का भुगतान किया जाता है.

शारीरिक अशक्तता होने पर
इसके अलावा महिला या पुरुष कर्मचारी नौकरी करने के दौरान किसी हादसे या बीमारी के कारण शारीरिक अशक्तता का शिकार हो जाता है. तो ऐसी परिस्थिति में नियोक्ता की तरफ से कर्मचारी को नियमानुसार ग्रेच्युटी की रकम का भुगतान किया जाता है.

साढ़े चार साल से ज्यादा की नौकरी
यदि किसी कंपनी में कर्मचार साढ़े चार साल से ज्यादा यानी 4 साल 7 महीने की नौकरी पूरी कर लेता है तो इस स्थिति में अंतिम वर्ष को कर्मचारी का पूरा साल ही माना जाता है. यानी अंतिम वर्ष में कर्मचारी 6 महीने से ज्यादा नौकरी करता है तो उसे नियोक्ता की तरफ से ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है. अन्य किसी भी परिस्थिति में कंपनी 5 साल से ग्रेच्युटी का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं