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महाराष्ट्रः पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बाघिन अवनी की मौत का खुलासा

जबकि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने खुद मीडिया के सामने यह कहा था कि बाघिन को उस वक्त गोली मारी गई जब उसने ट्रैंकुलाइजर (बंदूक द्वारा बेहोशी का इंजेक्शन) देने वाले वन्यकर्मी पर हमला कर दिया था.

एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट तक में लगाई थी गुहार 
बता दें कि यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा के वन क्षेत्र में बाघिन अवनि (टी-1) को शुक्रवार (02 नवंबर) देर रात मार दिया गया. नरभक्षी बाघिन अवनि (टी1) कथित रूप से 14 लोगों के साथ करीब 500 जंगली जानवरों का शिकार कर चुकी थी. जानकारी के मुताबिक, उसे खत्म करने के लिए 200 लोगों की टीम लगाई गई थी. वहीं, बाघिन को बचाने के लिए प्रयत्न और सेव टाइगर एनजीओ ने ‘लेट अवनी लिव’ अभियान चलाया था. एनजीओ ने अवनि को न मारने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई थी.

वन्‍यजीव संरक्षण की पैरोकार और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि महाराष्‍ट्र सरकार के उस मंत्री ने हैदराबाद के शार्प शूटर और आतंकवादियों को हथियारों की आपूर्ति करने वाले मशहूर शिकारी शहाफत अली से सम्पर्क किया. अली ने अपने बेटे असगर अली को भेजकर बाघिन की हत्या करवाई. नागपुर का वन विभाग नहीं चाहता था कि बाघिन को मारा जाए, लेकिन मंत्री ने इन अपराधियों को बुलवाकर अवनि की हत्या करवा दी.

सीएम ने बताया था बाघिन को मारने का फैसला क्यों लिया गया
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था, ‘‘(बाघिन के) के मारे जाने पर किसी को भी कोई खुशी नहीं है. वन विभाग ने यह फैसला किया क्योंकि उसने (बाघिन ने) 13-14 लोगों को मार डाला था. इस पर कुछ संदेह है कि बाघिन को पहले गोली लगी या फिर बेहोश करने के लिए तीर मारा गया. इस तथ्य की जांच की जाएगी.’’ फडणवीस ने कहा कि उन्हें मुहैया कराई गई प्राथमिक रिपार्ट के अनुसार बाघिन को उस वक्त गोली मारी गई जब बाघिन ने उसने (बाघिन ने) बेहोश करने की कोशिश कर रहे वनकर्मी पर हमला कर दिया.

बाघिन के मारे जाने के मामले पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के बयान पर सवाल किए जाने पर फडणवीस ने कहा कि मंत्री ने ‘‘सख्त शब्दों’’ का इस्तेमाल किया. महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने भी मेनका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा था कि केन्द्रीय मंत्री को मामले की उचित जानकारी नहीं है.