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बराक ओबामा 1 घंटे तक मनाते रहे, PM नरेंद्र मोदी टस से मस नहीं हुए, किताब का दावा

यह दावा बराक ओबामा के दौर में उनकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में शीर्ष सलाहकार रहे बेन रोड्स ने अपनी किताब ‘द वर्ल्ड एट इट इज: ए मेमोइर ऑफ द ओबामा व्हाइट हाउस’ में किया है.

वाशिंगटन: वैसे तो आम धारणा यही है कि जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा थे, तब पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके बेहद दोस्‍ताना ताल्‍लुकात थे. यहां तक कि जब बराक ओबामा पहली बार गणतंत्र दिवस के मुख्‍य अतिथि के रूप में भारत आए तो पीएम मोदी ने उनको ‘बराक’ कहकर संबोधित किया. लेकिन कूटनीति की दुनिया में राष्‍ट्र हित सर्वोपरि होता है. इसकी मिसाल 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने पेरिस जलवायु समझौते के मौके पर बराक ओबामा के साथ बातचीत में पेश की. यह दावा बराक ओबामा के दौर में उनकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में शीर्ष सलाहकार रहे बेन रोड्स ने अपनी किताब ‘द वर्ल्ड एट इट इज: ए मेमोइर ऑफ द ओबामा व्हाइट हाउस’ में किया है. यह किताब छह जून को बाजार में आने वाली है.

‘भारत को मनाना बेहद कठिन था’
2015 में पेरिस जलवायु समझौते के दौरान रोड्स रणनीतिक वार्ता के मामले में ओबामा के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. उन्‍होंने अपनी किताब में खुलासा किया है, ”जब हम पेरिस पहुंचे तो सबसे बड़ा काम भारत को मनाना था.” जलवायु समझौते के दौरान भारत-अमेरिका के बीच हुई अंतिम दौर की बातचीत का विस्तृत ब्योरा देते हुए रोड्स कहते हैं कि भारत को मनाने के लिए बराक ओबामा ने वहां के दो वार्ताकारों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली.

पीएम मोदी-बराक ओबामा की मुलाकात
रोड्स ने लिखा है, ‘‘करीब एक घंटे तक पीएम मोदी इस तथ्य पर जोर देते रहे कि उनके यहां 30 करोड़ लोगों के पास बिजली नहीं है और भारतीय अर्थव्यवस्था को वृद्धि देने के लिए कोयला सबसे सस्ता माध्यम है. उन्हें पर्यावरण की चिंता है, लेकिन उन्हें गरीबी से जूझ रहे लोगों की भी चिंता करनी है. ओबामा ने उन्हें सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उठाए गए कदमों, बाजार में बदलाव के कारण स्वच्छ ऊर्जा की लागत में आई कमी जैसी दलीलें दीं.”

barack obama-narendra modi
बराक ओबामा और पीएम मोदी के बेहद दोस्‍ताना ताल्‍लुकात माने जाते हैं.(फाइल फोटो)

किताब के अनुसार, ”लेकिन अब तक उन्होंने इस भेदभाव पर कुछ नहीं कहा था कि अमेरिका जैसे देशों ने अपना विकास कोयले से किया और अब वह भारत से ऐसा नहीं करने की मांग कर रहा है. बराक ओबामा ने अंत में कहा, देखिए, मैं मानता हूं कि यह सही नहीं है. मैं अफ्रीकी-अमेरिकी हूं. मोदी जानबूझकर मुस्‍कुराए और अपने हाथों की ओर देखा. वह बहुत दुखी लग रहे थे.”

ओबामा ने कहा, ”मुझे मालूम है कि देर से शुरुआत करना कैसा होता है, और अपने हिस्से से ज्यादा मेहनत करने को कहा जाना और ऐसा दिखाना कि कोई भेदभाव नहीं हुआ है, कैसा लगता है, लेकिन मैं उसके आधार पर अपनी पसंद तय नहीं करूंगा, आपको भी ऐसा नहीं करना चाहिए.” रोड्स ने कहा, ”मैंने ओबामा को किसी दूसरे नेता से इस तरह बात करते हुए नहीं सुना. ऐसा लगा कि मोदी ने उनकी इस पहल को सराहा. उन्होंने ऊपर की ओर देखा और हां में सिर हिलाया.”

इससे पहले के घटनाक्रम के बारे में भी वह लिखते हैं, ”हमारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का कार्यक्रम था. ओबामा और हम लोग बैठक कक्ष के बाहर इंतजार कर रहे थे. तभी मोदी से पहले भारतीय प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा. वास्तव में भारतीय वार्ताकारों को मनाना सबसे मुश्किल काम था.”

रोड्स लिखते हैं, ”ओबामा ने उनसे बातचीत करने को कहा, उनके बीच 20 मिनट तक बात हुई. ओबामा गलियारे में खड़े दोनों भारतीय वार्ताकारों से बातचीत करते रहे. मैं बगल में खड़े होकर अपने ब्लैकबेरी (मोबाइल फोन) को देख रहा था, जब ओबामा सौर ऊर्जा की बातें कर रहे थे.” यह अभूतपूर्व था, यह प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं था.