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शिलॉन्गः हिंसा के बाद तनाव बरकरार, राजधानी में प्रदर्शन जारी, CRPF की 11 कंपनियां तैनात

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में हिंसा के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. इस बीच सचिवालय के बाहर 300 प्रदर्शनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा सचिवालय के अंदर हैं. वहीं राजधानी की ओर से जाने वाले हर रास्ते पर निगरानी के लिए भारी सुरक्षा बल लगाया गया है.

राजधानी में प्रवेश के सभी मार्गों पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है. वहां पर नियंत्रण पर काबू पाने के लिए सीआरपीएफ की 11 कंपनियां तैनात की गई हैं. स्थानीय प्रशासन को ऐसी खबरें मिल रही थी बाहर के लोगों को भी शिलॉन्ग बुलाया जा रहा है, ऐसे में किसी अप्रिय स्थिति के बिगड़ने और हालात पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है.

पिछले हफ्ते हुई थी हिंसा

राजधानी शिलॉन्ग में पिछले हफ्ते गुरुवार को हुई हिंसा के बाद इलाके में माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है. तनावपूर्ण स्थिति के बीच रविवार को कर्फ्यू में कुछ ढील दी गई थी. लेकिन कुछ लोगों ने वहां बहाल होते अमन-चैन को बिगाड़ने की कोशिश की.

रविवार शाम को कुछ लोगों ने सुरक्षाबलों पर पेट्रोल बम से हमला भी किया था. पुलिस की टुकड़ी जिस दौरान यहां गश्त पर थी, तभी भीड़ ने उन पर पेट्रोल बम से हमला कर दिया. जिसके बाद पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले भी दागे. क्षेत्र में इंटरनेट को ऐहतियातन बंद कर दिया गया है.

हिंसा के बाद इस पर सियासत भी शुरू हो गई है. हिंसा पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का कहना है कि गुरुवार को भड़की हिंसा स्थानीय मुद्दे की वजह से हुई थी और यह सांप्रदायिक प्रकृति की हिंसा नहीं थी.

पंजाब की टीम CM से मिली

दूसरी ओर, घटना पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में सिखों की सुरक्षा के लिए चिंता व्यक्त की. उन्होंने पंजाब सरकार के 4 सदस्यों की टीम मेघालय पहुंच गई और उसने वहां मुख्यमंत्री से मुलाकात की कर ली है. इससे पहले शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की एक टीम वहां पहुंच भी गई.

पूरा मामला गुरुवार रात राजधानी में पंजाबी लाइन में रहने वाले कुछ लोगों के एक बस कंडक्टर के साथ हुई झड़प नस्लीय लड़ाई में बदल गई. बस चालकों ने जब इसके खिलाफ एकजुटता दिखाई तो मामला और बिगड़ गया. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. स्थानीय लोगों का गुस्सा पंजाबी लाइन में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों पर है.