बिहार एवं झारखंड

बिहार में महिलाओं को यौन शोषण से बचाने के लिए अब तैनात किए जाएंगे ट्रांसजेंडर गार्ड

नई दिल्ली: बिहार में बेसहारा महिलाओं को किसी संकट से बचाने के लिए बनाए गए अल्पावास गृह ही उनके लिए संकट का कारण बन गए हैं. बिहार सरकार ने अल्पावास गृह में यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए नया फैसला किया है. अब अल्पावास गृहों में ट्रांसजेंडर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे. सरकार द्वारा विभिन्न कारणों से घरों से भटकी महिलाओं एवं लड़कियों को आश्रय देने के लिए अल्पवास गृह का निर्माण कराया गया है.

पिछले दिनों मुजफ्फरपुर के अल्पावास गृह में देह व्यापार का बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें स्टाफ सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद छपरा में अल्पावास गृह में एक विक्षिप्त महिला के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद सनसनी फैल गई. इस मामले में भी दो लोगों के गिरफ्तार किया गया. राज्य

समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अल्पावास गृह में यौन शोषण की खबरे आने के बाद बिहार सरकार ने ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षा कर्मचारी के रूप में तैनात करने का फैसला किया है. ये फैसला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की एक रिपोर्ट के बाद किया गया, जिनमें इन अल्पावासों का सोशल ऑडिट कराने की बात कही गई थी.

समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘टीआईएसएस की रिपोर्ट में यौन शोषण का जिक्र किया गया है और इसके रोकथाम के उपाए भी सुझाए गए हैं. टीआईएसएस ने कई लड़कियों के नाम बताए, लेकिन पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. हमने टीम की जांच के आधार पर मुजफ्फरपुर में एक केस फाइल किया और अपने अधिकारियों से कहा है कि वो इन अल्पावासों का समय समय पर सोशल ऑडिट करें.’

उन्होंने बताया, ‘हम अल्पावास गृहों में ट्रांसजेंडर सुरक्षा गार्ड को तैनात करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे थे. इस प्रस्ताव को सोमवार को मुंख्यमंत्री की मंजूरी मिल जाने के बाद हमने इसे लागू करने के लिए औपचारिक आर्डर जारी कर दिया. अल्पावास गृहों में सुरक्षाकर्मी के तैयार पर नियुक्ति के लिए ट्रांसजेंडर को प्राथमिकता दी जाएगी. इस कदम से यौन शोषण में कमी आएगी. साथ ही ट्रांसजेंडर लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे.’ बिहार में इस समय 110 अल्पावास गृह हैं, जहां घरेलू हिंसा या मानव तस्करी की शिकार महिलाओं को लाया जाता है. इन्हें एनजीओ द्वारा संचालित किया जाता है और सरकार उन्हें ग्रांट देती है.