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जब महात्मा गांधी ने बाढ़ में डूबे केरल के लिए जुटाए थे 6000 रु, महिलाओं ने दे दिए थे जेवर

नई दिल्ली : सदी की सबसे भयानक बाढ़ झेलने वाला केरल इस समय उससे उबरने में लगा हुआ है. इससे पहले 1924 में केरल में सबसे भयानक बाढ़ आई थी. उस समय देश में अंग्रेजी शासन था. तब ये बाढ़ केरल के मालाबार इलाके में आई थी. उस समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बाढ़ में डूबे केरल की मदद के लिए पूरे देश से 6 हजार रुपए जुटाए थे. उस समय के हिसाब से ये बहुत बड़ी रकम थी. इससे भी बड़ी बात थी, इसे देश भर से जुटाना. इस बार की बाढ़ में 290 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. वहीं 10 लाख लोगों को बाढ़ के कारण विस्थापित होना पड़ा है. लेकिन 1924 की उस बाढ़ में इससे कहीं ज्यादा जानें गई थीं.

तब महात्मा गांधी ने अपने अखबार यंग इंडिया और नवजीवन में इस बाढ़ के बारे रोजाना लिखकर लोगों को इस भयावह त्रासदी के बारे में बताया था. तब उन्होंने इन्हीं अखबारों के माध्यम से लोगों को बताया था कि लोग मालाबार (केरल) की मदद करें.

महिलाओं ने अपनी ज्वेलरी कर दी थी दान
महात्मा गांधी की उस अपील का सभी पर जबर्दस्त असर हुआ. महिलाओं ने अपनी ज्वेलरी तक दान में दी. कई बच्चों ने भी इस अपील पर दान दिया था. कई लोगों ने दान देने के लिए एक दिन का खाना भी नहीं खाया. कइयों ने अपने हिस्से का दूध बेचकर फंड में दान दिया था.

जब एक बच्ची ने चुराए हुए पैसे भी किए दान…
महात्मा गांधी ने अपने समाचार पत्र नवजीवन में लिखे एक लेख में बताया कि एक लड़की ने तो चोरी किए 3 पैसे भी दान में दे दिए थे. उन्होंने अपने लेख में बताया कि उस समय मालाबार का हिस्सा बहुत पीड़ा से गुजर रहा था, लेकिन उन्हें उम्मीद से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला और लोगों ने जमकर पैसा दान में दिया.